स्तनपान के दौरान मैस्टाइटिस (स्तनों में सूजन)
मैस्टाइटिस क्या है?
मैस्टाइटिस आपके स्तन ऊत्तकों में होने वाली सूजन व असहजता है। यह सूजन बहुत जल्दी इनफेक्शन का रूप ले सकती है, जिसका मतलब है कि सूजे हुए ऊत्तकों में जीवाणु (बैक्टीरिया) विकसित होने लगते हैं। हो सकता है अपने स्तनों के क्षेत्र में आप निम्नांकित समस्याएं महसूस करें:
1. लाल होना
2. ठोस होना
3. दर्द होना
4. गर्म महसूस होना
5. सूजन होना
आपको गांठ भी महसूस हो सकती है, जो कि स्तन में दूध इकट्ठा होने की वजह से होती है। इसे अक्सर अवरुद्ध नलिका (ब्लॉक्ड डक्ट) कहा जाता है, हालांकि वास्तव में यह कोई रुकावट होने की वजह से नहीं होता। यहां आपका बैक-अप यानि अतिरिक्त दूध रिसकर आपके स्तन ऊत्तकों में आ गया है, जिससे इनमें सूजन हो गई है।
स्तन में गांठ वाला क्षेत्र आपको शायद पत्ती के आकार का (वेज शेप) का लगेगा क्योंकि आसपास की नलिका, छोटी नलिकाएं और एल्वियोली सभी में सूजन होगी।
आपको फ्लू के लक्षण भी महसूस हो सकते हैं, जैसे कि:
1. कंपकपी
2. सिरदर्द
3. 101 डिग्री फेहरनहाइट से ज्यादा बुखार
4. थकान
5. बदन दर्द
6. सुस्ती
आमतौर पर स्तनपान करवाने वाली 10 में से एक माँ को मैस्टाइटिस होता है। बोतल से दूध पिलाने वाली कुछ माँओं को भी मैस्टाइटिस हो जाता है।
आपके स्तनों के माप का इससे कोई लेना-देना नहीं है। इस बात के कोई प्रमाण नहीं हैं कि बड़े या छोटे स्तनों वाली महिलाओं को मैस्टाइटिस होने की संभावना ज्यादा या कम रहती है।
मैस्टाइटिस होना काफी पीड़ादायी है, मगर सही उपाय या विकल्पों से इसे जल्द ही ठीक किया जा सकता है। यह आमतौर पर एक स्तन में ही होता है, मगर एक बार में दोनों स्तनों में होना भी संभव है। दुर्भाग्यवश, आपको मैस्टाइटिस एक से ज्यादा बार भी हो सकता है।
स्तनपान करवाने वाली माँओं में मैस्टाइटिस होने के क्या कारण हैं?
मैस्टाइटिस अधिकांशत: स्तन में दूध के बढ़ जाने पर होता है क्योंकि दूध जितनी जल्दी बन रहा है उतनी शीघ्रता से निकाला नहीं जा रहा है (मिल्क स्टेसिस)।
मिल्क स्टेसिस की स्थिति तब होती है जब स्तनपान के दौरान शिशु स्तनों से पर्याप्त दूध नहीं ले पा रहा हो। ऐसा शिशु द्वारा स्तन सही ढंग से मुंह में न ले पाने (लैचिंग) की वजह से हो सकता है।
यदि शिशु एक स्तन में सही ढंग से लैच नहीं कर रहा, तो इससे निप्पल में दर्द हो सकता है और आपके लिए उस स्तन से दूध पिलाना मुश्किल हो सकता है। इससे अतिपूरित स्तन, मिल्क स्टेसिस और फिर मैस्टाइटिस हो सकता है। यदि आपका शिशु किसी एक स्तन से दूध पीना ज्यादा पसंद करता है, तो जिस स्तन से वह कम बार दूध पीता है उसमें मैस्टाइटिस होने का खतरा ज्यादा होता है।
मिल्क स्टेसिस और फिर मैस्टाइटिस होने के निम्न कारण हो सकते हैं:
- स्तन भरे-भरे रहना (एन्गॉर्जमेंट), जो सामान्य न हो पाएं, शायद शिशु के पूरी रात अच्छी तरह सोने की वजह से।
- तय दिनचर्या के अनुसार दूध पिलाना, ताकि एक फीड से दूसरे फीड के बीच लंबा अंतराल हो।
- कपड़ों की वजह से स्तन पर दबाव पड़ना, ब्रा की पट्टी तंगहोना या अंडवायर ब्रा, आपके सोने की अवस्था, सीट बेल्ट या फिर पर्स या डायपर बैग इस तरह से लेना कि आपके स्तनों पर दबाव पड़े।
- कई बार मिल्क स्टेसिस की स्थिति बिगड़ सकती है और रोगजनक मैस्टाइटिस का रूप ले लेती है। ऐसा तब हो सकता है जब आपके निप्पलों में क्रेक हो। निप्पल के क्रेक या छिद्र के जरिये इनफेक्शन आपके स्तन की लसीका प्रणाली में प्रवेश कर सकता है।
- पहली बार माँ बनी महिलाओं में मैस्टाइटिस होने की संभावना अधिक होती है, हालांकि पहले भी स्तनपान करवा चुकी माँओं को भी यह हो सकता है। मैस्टाइटिस स्तनपान के किसी भी दौर में हो सकता है। हालांकि, यह पहले तीन माह में अधिक आम है, विशेषतौर पर दूसरे या तीसरे सप्ताह में, जब आप स्तनपान की आदि होने का प्रयास कर रही होती हैं।
- मैस्टाइटिस को पैसिफायर या सूदर या फिर बोतल इस्तेमाल करने वाले शिशुओं से भी जोड़ा गया है। इन चीजों के इस्तेमाल की वजह से शिशु स्तनों पर ज्यादा समय नहीं लगा रहता और साथ ही ये स्तनों को मुंह में लेने के तरीके को भी प्रभावित करते है।
- यदि आपके शिशु को टंग टाई है, तो भी उसे स्तनों को सही ढंग से मुंह में लेने में दिक्कत हो सकती है।
मैस्टाइटिस का उपचार कैसे किया जा सकता है?
प्रभावित स्तन से भी शिशु को स्तनपान कराती रहें। हालांकि, ऐसा करने में आपको बहुत दर्द हो सकता है, मगर यदि आप उस स्तन से दूध पिलाना बंद कर देंगी तो मैस्टाइटिस और अधिक बिगड़ सकता है।
यदि आपकी तबियत ठीक न लगे या शिशु को स्तनपान करवाने से भी सूजन व असहजता में कोई फर्क न पड़े तो डॉक्टर से मिलें। यदि कुछ दिनों से आपको मैस्टाइटिस और इसमें इनफेक्शन हो गया है तो डॉक्टर आपको एंटीबायोटिक दवाएं दे सकते हैं, जिनका सेवन स्तनपान के दौरान सुरक्षित हो।
यहां कुछ घरेलू तरीके भी बताए गए हैं जिनका इस्तेमाल आप एंटीबायोटिक लेने या न लेने पर भी कर सकती हैं:
- सुनिश्चित करें कि शिशु ने सही ढंग से स्तन मुंह में लिया है और सही से दूध पी रहा है।
- स्तनपान की अलग-अलग अवस्थाओं को आजमाकर देखें कि कौन सी अवस्था में शिशु सही ढंग से लैच कर पा रहा है।
- शिशु को इस तरह स्तन से लगाएं कि उसका निचला जबड़ा आपके स्तन के सूजे हुए हिस्से की तरफ हो। उदारहण के तौर पर यदि मैस्टाइटिस स्तन के ऊपरी हिस्से के पास है, तो शिशु को रग्बी होल्ड अवस्था में स्तनपान करवाएं।
- शिशु जब चाहे उसे स्तनपान करवाएं, दिन में कम से कम आठ से 12 बार।
- यदि शिशु ने पूरी तरह दूध नहीं पीया है तो स्तनपान करवाने के बाद हाथ या पंप की सहायता से दूध निकालें (एक्सप्रेस)। यदि आपके निप्पलों मे दर्द हो तो यह काफी काम आ सकता है।
- आराम करें और पर्याप्त तरल पदार्थ लें। जब आप आराम करें तो अपने पति या परिवार के अन्य सदस्य को शिशु की देखभाल करने दें।
- स्थिति सुधरने तक ढीले-ढाले कपड़े या ढीली ब्रा पहनें।
- आप पाएंगी कि स्तन पर गर्माहट का सेक करना मदद करता है। तौलिया या कम्प्रेस को अपनी त्वचा पर लगाएं या हल्के गर्म पानी से नहा लें। यह भी संभव है कि आपको ठंडी सिकाई से ज्यादा आराम मिले। कई महिलाओं को पत्तागोभी का एकदम ठंडा पत्ता लगाने से भी आराम मिलता है।
- शिशु जब स्तनपान कर रहा हो, तो अपने स्तनों को हल्के से मालिश करें। जहां से आपको गांठ महसूस हो रही हो, वहां से निप्पल की तरफ मालिश करें। अधिक बल से मालिश करना मैस्टाइटिस को और बिगाड़ सकता है क्योंकि यह रिस कर आए दूध को स्तन ऊत्तकों में और अंदर ले जाता है।
- आप दर्द कम करने के लिए डॉक्टर द्वारा बताई गई दर्दनिवारक दवा ले सकती हैं। ध्यान रखें कि स्तनपान के दौरान एस्पिरिन का सेवन उचित नहीं है।
- कुछ माँएं पाती है कि मैस्टाइटिस के उपचार में होम्योपैथिक दवाएं फायदा करती हैं। यदि आप यह आजमाना चाहे तो किसी मान्यता प्राप्त होम्योपैथी डॉक्टर से सलाह लें।
- आप ये घरेलू उपचार एंटीबायोटिक लेने से पहले आजमा सकती हैं।
यदि आपको सुधार न लगे तो डॉक्टर से मिलने को टाले न। यदि मैस्टाइटिस ठीक न हो तो यह स्तन फोड़े का रूप ले सकता है। यह स्तन के अंदर मवाद इकट्ठी होने की स्थिति है और मैस्टाइटिस से ग्रस्त कुछ महिलाओं को होती है।
यदि आपको स्तन फोड़ा है तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता की जरुरत होगी और कई बार मवाद या पस निकालने के लिए आॅपरेशन भी करना पड़ता है। फोड़ा लाल और छूने पर गर्म महसूस हो सकता है इसमें सूजन हो सकती है और आपको तेज बुखार भी हो सकता है।
यदि आपका शिशु सही ढंग से स्तनपान नहीं कर रहा या उचित ढंग से लैच नहीं कर पा रहा तो डॉक्टर से मदद लें। वे आपको किसी स्तनपान सलाहकार या नवजात फीडिंग स्पेशलिस्ट के पास जाने को कह सकती हैं। मदद के लिए आप हमारी स्तनपान संस्थाओं की सूची भी देख सकती हैं।
मैस्टाइटिस कितने समय तक रहता है?
यदि इसका पता जल्दी चल जाए, तो मैस्टाइटिस का उपचार आसान और जल्द है और आपको आराम आने में ज्यादा समय भी नहीं लगेगा। यदि आप एंटीबायोटिक का कोर्स शुरु करती हैं, तो सुनिश्चित करें कि यह कोर्स पूरा करें।
यदि आपके स्तन में दर्द रहे और एंटीबायोटिक दवाएं लेने के कुछ दिन बाद भी आपको बुखार रहे तो दोबारा डॉक्टर को दिखाएं। ऐसा किस तरह के बैक्टीरिया की वजह से हो रहा है, यह जानने के लिए हो सकता है आपको टेस्ट करवाने की जरुरत हो। इस तरह आपको सही दवा देना आसान रहेगा।
यदि मुझे मैस्टाइटिस है, तो क्या स्तनपान करवाना बंद कर देना चाहिए?
नहीं, यह जरुरी है कि मैस्टाइटिस होने पर आप स्तनपान करवाना जारी रखें। दूध का प्रवाह बना रहे तो बेहतर है इससे आपको ठीक होने में मदद मिलेगी। हालांकि कई बार ऐसा करने में बहुत दर्द महसूस होगा, मगर आपको शिशु को जितनी बार वह चाहे उतनी ज्यादा बार स्तनपान करवाना होगा।
यदि आपको स्तनपान करवाने में बहुत ही ज्यादा दर्द हो, तो हर बार स्तनपान करवाने से पहले स्तनों पर कई मिनटों तक गर्म सिकाई करें। इससे लेटडाउन रिफ्लेक्स होने में मदद मिलेगी और स्तनपान करवाना आपके लिए सहनीय होगा।
यदि प्रभावित स्तन से शिशु पूरा दूध खत्म न करें या स्तनपान करवाने में बहुत दर्द हो तो आप ब्रेस्ट पंप से दूध एक्सप्रेस कर सकती हैं। यह दूध आप उसे पलड़ाई, कटोरी या बोतल से पिला सकती हैं।
क्या स्तनपान करने पर शिशु पर मैस्टाइटिस का असर होगा?
हालांकि आप अस्वस्थ व असहज महसूस कर सकती हैं, मगर मैस्टाइटिस से आपके शिशु पर असर नहीं होगा। शिशु के लिए आपके प्रभावित स्तन से दूध पीना एकदम सुरक्षित है, मगर उसे दूध सामान्य की तुलना में अधिक नमकीन लग सकता है।
यदि आपको रोगजनक मैस्टाइटिस हो और शिशु दूध में मौजूद बैक्टीरिया भी गटक ले तो भी ये उसके पेट में मौजूद एसिड की वजह से मर जाएंगे।
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